राजनीति

अगर कर्नाटक चुनाव में BJP हार जाती है, तो देश की राजनीति में आ जाएगा भूचाल…

कर्नाटक में किसकी सरकार बनेगी इसका अंदाजा लगाना हर बार मुश्किल होता है. इस बार एग्जिट पोल के नतीजे दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होगी. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर दक्षिण भारत की राजनीति की प्रस्तावना के तौर पर भी देखे जा रहे हैं. लेकिन सरकार आखिर में किसकी बनेगी इस पर अभी कुछ भी कह पाना मुश्किल है. लेकिन अगर बीजेपी चुनाव हारती है तो क्या होगा…. सर्वे के मुताबिक कांग्रेस को इस चुनाव में 110 से 112 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं जबकि बीजेपी को 73 से 85 सीटें मिल सकती है. वहीं क्षेत्रीय पार्टी जेडीएस को 21 से 29 सीटें मिल सकती हैं. इंडिया टुडे-सी वोटर के सर्वे के मुताबिक भी बीजेपी को 74-86 सीटें मिल सकती हैं. कर्नाटक में इस बार तस्वीर बदली हुई है. साल 2018 के चुनाव में कांग्रेस को अपनी सत्ता बचानी थी तो इस बार बीजेपी के सामने वही चुनौती है. कर्नाटक का इतिहास रहा है कि 1985 से कोई भी पार्टी सत्ता में लगातार दूसरी बार सरकार नहीं बना पाई है.बीजेपी के सामने सिर्फ कर्नाटक ही जीतने की चुनौती नहीं है. राहुल गांधी की यात्रा के बाद कांग्रेस उनकी गंभीर नेता की छवि के तौर पर पेश कर रही है. दक्षिण भारत में इसके असर का दावा कांग्रेस कर रही है. दूसरी ओर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली में विपक्षी एकता का झंडा उठाए हैं और सभी नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर बीजेपी कर्नाटक का चुनाव हारती है तो नीतीश की इस कवायद को मजबूती मिल सकती है. वहीं राहुल गांधी की यात्रा को सफलता से भी जोड़ा जाएगा.दूसरी ओर बीजेपी के पास दक्षिण भारत की 129 लोकसभा सीटों में अभी सिर्फ 29 सीटें हैं जिसमें 25 सीटें तो सिर्फ कर्नाटक से हैं. बीजेपी इस बार कोशिश कर रही है कि हिंदी राज्यों में अगर सीटें कम पड़ती हैं तो इसकी भरपाई दक्षिण से हो जाए. अगर कर्नाटक का गढ़ बीजेपी के हाथ से निकलता है तो बीजेपी के दक्षिण मिशन पर भी झटका लगेगा. गौरतलब है कि बीजेपी तेलंगाना में टीआरएस को हराने के लिए हर बार पुरजोर कोशिश करती रही है दूसरी ओर केरल में ईसाइयों को लुभाकर बड़ी ताकत बनने की कोशिश कर रही है. कर्नाटक विधानसभा का चुनाव कांग्रेस के लिए ‘करो या मरो’ वाला है. बीते कुछ सालों में हिमाचल छोड़ दें तो गुजरात, पंजाब, यूपी, उत्तराखंड सहित कई राज्यों में झटका ही लगा है. कर्नाटक एक ऐसा राज्य हैं जहां पर कांग्रेस से बीजेपी की सीधी टक्कर है. कई सीटों पर जेडीएस भी मजबूत है. क्षेत्रीय दलों के नेता जैसे ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल हमेशा इस बात पर अंदेशा जताते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस काफी नहीं है. अब अगर इस हालात में भी कांग्रेस सरकार नहीं बना पाती है तो इन नेताओं की बात सही साबित हो जाएगी. ऐसे में नतीजा ये होगा कि पीएम मोदी की अगुवाई में चुनाव दर चुनाव जीत रही बीजेपी का सामना करने के लिए कांग्रेस के पास शायद ही कोई क्षेत्रीय दल आए.कांग्रेस ने इस बार के एग्जिट पोल पर कहा, ‘जैसे-जैसे पोल के नतीजे आ रहे हैं यह और साफ हो रहा है कि कांग्रेस पार्टी धमाकेदार जीत की राह पर है.’ वहीं सीएम बसवराज बोम्मई ने एग्जिट पोल को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि मतदान का उच्च प्रतिशत हमेशा बीजेपी के पक्ष में रहा है न कि कांग्रेस के जैसा कि कुछ प्रतिद्वंद्वी नेता दावा करते रहे हैं. शिग्गांव से चुनाव मैदान में उतरे बोम्मई ने कहा, ‘एग्जिट पोल तो एग्जिट पोल हैं. वे शत प्रतिशत सही नहीं हो सकते. ऐसा अंतर होगा जो पूरे परिदृश्य को बदल सकती है.’ बीजेपी ने निर्वतमान सीएम बसवराज बोम्मई के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा है. बोम्मई लिंगायत समुदाय से आते हैं जो कर्नाटक में हार-जीत में बड़ी भूमिका निभाते हैं. वहीं कांग्रेस ने किसी भी गुटबाजी से बचने के लिए बिना सीएम पद के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा है.

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